Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.53: जब साधक सत्य और असत्य अर्थात् संसार के व्यक्त और अव्यक्त पदार्थ, दुःख और सुख, भय और अभय, प्रिय और अप्रिय आदि समस्त द्वन्द्वों को त्याग देता है, तब उसका मन शान्त हो जाता है ॥ 53॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
उभे सत्यानृते त्यक्त्वा शोकानन्दौ भयाभये।
प्रियाप्रिये परित्यज्य प्रशान्तात्मा भविष्यति॥ ५३॥
अनुवाद
जब साधक सत्य और असत्य अर्थात् संसार के व्यक्त और अव्यक्त पदार्थ, दुःख और सुख, भय और अभय, प्रिय और अप्रिय आदि समस्त द्वन्द्वों को त्याग देता है, तब उसका मन शान्त हो जाता है ॥ 53॥
When a seeker abandons all the dualities of truth and untruth, i.e., the manifest and unmanifest things of the world, grief and joy, fear and fearlessness, the pleasant and the unpleasant, etc., then his mind becomes peaceful. ॥ 53॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥