Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.43: जो वस्तु दुःख, पीड़ा या कष्ट का कारण बनती है, अथवा जो अत्यधिक परिश्रम कराती है, चाहे वह उस दुःख का मूल कारण ही क्यों न हो, चाहे वह शरीर का कोई अंग ही क्यों न हो, उसे त्याग देना चाहिए ॥43॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यन्निमित्तं भवेच्छोकस्तापो वा दु:खमेव च।
आयासो वा यतो मूलमेकाङ्गमपि तत् त्यजेत्॥ ४३॥
अनुवाद
जो वस्तु दुःख, पीड़ा या कष्ट का कारण बनती है, अथवा जो अत्यधिक परिश्रम कराती है, चाहे वह उस दुःख का मूल कारण ही क्यों न हो, चाहे वह शरीर का कोई अंग ही क्यों न हो, उसे त्याग देना चाहिए ॥43॥
If that which causes grief, pain or suffering, or which causes one to put in excessive effort, even if it is the root cause of that suffering, even if it is a part of the body, then it should be abandoned. ॥ 43॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥