Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.174.38: आलस्य प्रारम्भ में सुख के समान प्रतीत होता है; किन्तु अन्त में दुःख देता है और कार्य में कुशलता दुःख के समान प्रतीत होती है; किन्तु सुख का उत्पादक है। लक्ष्मी सहित धन कुशल मनुष्य में ही रहता है, आलसी में नहीं ॥38॥ | mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
आलस्य प्रारम्भ में सुख के समान प्रतीत होता है; किन्तु अन्त में दुःख देता है और कार्य में कुशलता दुःख के समान प्रतीत होती है; किन्तु सुख का उत्पादक है। लक्ष्मी सहित धन कुशल मनुष्य में ही रहता है, आलसी में नहीं ॥38॥
In the beginning laziness seems like happiness; but in the end it gives pain and skill in work seems like pain; but it is the producer of happiness. Wealth along with Lakshmi resides only in the efficient man, not in the lazy one. ॥ 38॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥