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mahabharat 12.174.34: बुद्धिमान पुरुष अन्तिम अवस्था में आनन्दित होते हैं, मध्य अवस्था में नहीं। अन्तिम अवस्था की प्राप्ति सुखरूप कही गई है और उनके बीच की अवस्था दुःखरूप कही गई है। 34॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 34
 
 
श्लोक  12.174.34 
अन्त्येषु रेमिरे धीरा न ते मध्येषु रेमिरे।
अन्त्यप्राप्तिं सुखामाहुर्दु:खमन्तरमन्त्ययो:॥ ३४॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान पुरुष अन्तिम अवस्था में आनन्दित होते हैं, मध्य अवस्था में नहीं। अन्तिम अवस्था की प्राप्ति सुखरूप कही गई है और उनके बीच की अवस्था दुःखरूप कही गई है। 34॥
 
Wise men rejoice in the final stages, not in the intermediate stages. Attainment of the final state is said to be a form of happiness and the state between them is said to be a form of sorrow. 34॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)