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mahabharat 12.174.28: मनुष्य के शुभचिंतक मित्र हों या न हों, वह मित्रों के साथ हो या शत्रुओं के साथ, वह बुद्धिमान हो या मूर्ख, उसे सुख तभी मिलता है जब ईश्वर उसके साथ होता है। 28.   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.174.28 
असुहृत् ससुहृच्चापि सशत्रुर्मित्रवानपि।
सप्रज्ञ: प्रज्ञया हीनो दैवेन लभते सुखम्॥ २८॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य के शुभचिंतक मित्र हों या न हों, वह मित्रों के साथ हो या शत्रुओं के साथ, वह बुद्धिमान हो या मूर्ख, उसे सुख तभी मिलता है जब ईश्वर उसके साथ होता है। 28.
 
Whether a man has well-wishing friends or not, whether he is with friends or enemies, whether he is intelligent or unwise, he finds happiness only when the divine is on his side. 28.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)