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mahabharat 12.174.23: मनुष्य नाना प्रकार के मोह-बंधनों में बँधे हुए हैं, इसलिए वे सदा विषय-भोगों की आसक्ति से घिरे रहते हैं; इसलिए जैसे रेत के बने पुल जल के वेग से बह जाते हैं, वैसे ही ऐसे मनुष्यों की विषय-वासनाएँ पूर्ण नहीं होतीं; जिससे वे दुःख भोगते रहते हैं॥ 23॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 23
 
 
श्लोक  12.174.23 
स्नेहपाशैर्बहुविधैराविष्टविषया जना:।
अकृतार्थाश्च सीदन्ते जलै: सैकतसेतव:॥ २३॥
 
 
अनुवाद
मनुष्य नाना प्रकार के मोह-बंधनों में बँधे हुए हैं, इसलिए वे सदा विषय-भोगों की आसक्ति से घिरे रहते हैं; इसलिए जैसे रेत के बने पुल जल के वेग से बह जाते हैं, वैसे ही ऐसे मनुष्यों की विषय-वासनाएँ पूर्ण नहीं होतीं; जिससे वे दुःख भोगते रहते हैं॥ 23॥
 
Human beings are bound in various types of bonds of affection, therefore they are always surrounded by attachment to sensual pleasures; therefore just as bridges made of sand get washed away by the force of water, similarly the sensual desires of such human beings are not fulfilled; due to which they keep on suffering.॥ 23॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)