Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.174.10: राजन्! तुम मूर्खों की भाँति क्यों मोहग्रस्त हो रहे हो? तुम स्वयं शोक करने के योग्य हो, फिर दूसरों के लिए शोक क्यों करते हो? अरे! एक दिन ऐसा आएगा, जब तुम्हारे लिए शोक करते हुए अन्य शोक करने वाले लोग भी वही दण्ड भोगेंगे॥ 10॥   |   mahabharat अध्याय 12.174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 174: शोकाकुल चित्तकी शान्तिके लिये राजा सेनजित् और ब्राह्मणके संवादका वर्णन  »  श्लोक 10
 
 
श्लोक  12.174.10 
किं नु मुह्यसि मूढस्त्वं शोच्य: किमनुशोचसि।
यदा त्वामपि शोचन्त: शोच्या यास्यन्ति तां गतिम्॥ १०॥
 
 
अनुवाद
राजन्! तुम मूर्खों की भाँति क्यों मोहग्रस्त हो रहे हो? तुम स्वयं शोक करने के योग्य हो, फिर दूसरों के लिए शोक क्यों करते हो? अरे! एक दिन ऐसा आएगा, जब तुम्हारे लिए शोक करते हुए अन्य शोक करने वाले लोग भी वही दण्ड भोगेंगे॥ 10॥
 
‘King! Why are you getting deluded like a fool? You yourself are worthy of mourning, then why do you mourn for others? Oh! A day will come when other mourning people will also meet the same fate while mourning for you.॥ 10॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)