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mahabharat 12.173.1: भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात विरुपाक्ष ने बकराज के लिए चिता तैयार करवाई, उसे अनेक रत्नों, सुगन्धित चन्दन और वस्त्रों से सजाया गया ॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 173: राजधर्मा और गौतमका पुन: जीवित होना  »  श्लोक 1
 
 
श्लोक  12.173.1 
भीष्म उवाच
ततश्चितां बकपते: कारयामास राक्षस:।
रत्नैर्गन्धैश्च बहुभिर्वस्त्रैश्च समलंकृताम्॥ १॥
 
 
अनुवाद
भीष्मजी कहते हैं - राजन ! तत्पश्चात विरुपाक्ष ने बकराज के लिए चिता तैयार करवाई, उसे अनेक रत्नों, सुगन्धित चन्दन और वस्त्रों से सजाया गया ॥1॥
 
Bhishmaji says – King! Thereafter Virupaksha got a funeral pyre prepared for Bakraj. It was decorated with many gems, fragrant sandalwood and clothes. 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)