श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 6
 
 
श्लोक  12.171.6 
भीष्म उवाच
ततो राजा विममृशे कथं कार्यमिदं भवेत् ।
कथं वा सुकृतं मे स्यादिति बुद्धॺान्वचिन्तयत् ॥ ६॥
 
 
अनुवाद
भीष्म कहते हैं - युधिष्ठिर ! यह सुनकर दैत्यराज मन में विचार करने लगे कि अब क्या करूँ ? किस प्रकार पुण्य प्राप्त करूँ ? इस प्रकार वे मन से बार-बार विचार करते रहे ॥6॥
 
Bhishma says - Yudhishthira! On hearing this, the king of demons began to think in his mind that what should he do now? How can I attain virtue? In this manner he thought and pondered over and over again using his mind.॥ 6॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)