श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 4
 
 
श्लोक  12.171.4 
राक्षस उवाच
क्व ते निवास: कल्याण किंगोत्रा ब्राह्मणी च ते।
तत्त्वं ब्रूहि न भी: कार्या विश्वसस्व यथासुखम्॥ ४॥
 
 
अनुवाद
राक्षसराज ने कहा, "भद्र! तुम कहाँ रहते हो? तुम्हारी पत्नी किस कुल की है? मुझे सब ठीक-ठीक बताओ। डरो मत। मुझ पर विश्वास करो और सुख से रहो।"
 
The demon king said - Bhadra! Where do you live? Which clan does your wife belong to? Tell me everything exactly. Do not be afraid. Trust me and live happily.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)