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mahabharat 12.171.14: जब राजा द्वारा सम्मानित श्रेष्ठ ब्राह्मण उन आसनों पर बैठे, तब विरुपाक्ष ने तिल, कुश और जल से उनकी विधिपूर्वक पूजा की ॥14॥   |   mahabharat अध्याय 12.171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.171.14 
तासु ते पूजिता राज्ञा निषण्णा द्विजसत्तमा:।
तिलदर्भोदकेनाथ अर्चिता विधिवद् द्विजा:॥ १४॥
 
 
अनुवाद
जब राजा द्वारा सम्मानित श्रेष्ठ ब्राह्मण उन आसनों पर बैठे, तब विरुपाक्ष ने तिल, कुश और जल से उनकी विधिपूर्वक पूजा की ॥14॥
 
When those best Brahmins honored by the king sat on those seats, Virupaksha worshiped them duly with sesame seeds, kush and water. 14॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)