श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 171: गौतमका राक्षसराजके यहाँसे सुवर्णराशि लेकर लौटना और अपने मित्र बकके वधका घृणित विचार मनमें लाना  »  श्लोक 13
 
 
श्लोक  12.171.13 
बृस्यस्तेषां तु संन्यस्ता राक्षसेन्द्रस्य शासनात् ।
भूमौ वरकुशा: स्तीर्णा: प्रेष्यैर्भरतसत्तम॥ १३॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! दैत्यराज की आज्ञा से सेवकों ने उनके लिए भूमि पर कुशा की सुन्दर चटाई बिछा दी।
 
O best of the Bharatas! By the order of the King of Demons the servants spread beautiful mats of kusha grass on the ground for them.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)