Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.170.14-15: तत्पश्चात्, जब प्रातःकाल हुआ, तो राजा धर्म ने ब्राह्मण की भलाई का उपाय सोचा और कहा, "सौम्य! इस मार्ग से जाओ, तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। यहाँ से तीन योजन दूर जो नगर है, वहाँ महाबली दैत्यराज विरुपाक्ष रहते हैं। वे मेरे परम मित्र हैं।"   |   mahabharat अध्याय 12.170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 170: गौतमका राजधर्माद्वारा आतिथ्यसत्कार और उसका राक्षसराज विरूपाक्षके भवनमें प्रवेश  »  श्लोक 14-15
 
 
श्लोक  12.170.14-15 
तत: प्रभातसमये सुखं दृष्ट्वाब्रवीदिदम्।
गच्छ सौम्य पथानेन कृतकृत्यो भविष्यसि॥ १४॥
इतस्त्रियोजनं गत्वा राक्षसाधिपतिर्महान्।
विरूपाक्ष इति ख्यात: सखा मम महाबल:॥ १५॥
 
 
अनुवाद
तत्पश्चात्, जब प्रातःकाल हुआ, तो राजा धर्म ने ब्राह्मण की भलाई का उपाय सोचा और कहा, "सौम्य! इस मार्ग से जाओ, तुम्हारा कार्य सिद्ध होगा। यहाँ से तीन योजन दूर जो नगर है, वहाँ महाबली दैत्यराज विरुपाक्ष रहते हैं। वे मेरे परम मित्र हैं।"
 
Thereafter, when the morning dawned, King Dharma thought of a way to ensure the well-being of the Brahmin and said, 'Soumya! Go by this route, your task will be accomplished. The city which is three yojanas away from here, is where the mighty demon king Virupaksha lives. He is my great friend.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)