श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.168.5 
भीष्म उवाच
संधेयान् पुरुषान् राजन्नसंधेयांश्च तत्त्वत:।
वदतो मे निबोध त्वं निखिलेन युधिष्ठिर॥ ५॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे राजा युधिष्ठिर! हमें किसके साथ संधि (मित्रता) करनी चाहिए और किसके साथ नहीं? यह मैं तुम्हें विस्तारपूर्वक बता रहा हूँ। सब कुछ ध्यानपूर्वक सुनो।
 
Bhishma said, "O King Yudhishthira! With whom should we make peace (friendship) and with whom should we not? I am telling you this in detail. Listen to everything carefully.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)