श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.168.29 
भीष्म उवाच
हन्त ते वर्तयिष्येऽहमितिहासं पुरातनम्।
उदीच्यां दिशि यद् वृत्तं म्लेच्छेषु मनुजाधिप॥ २९॥
 
 
अनुवाद
भीष्म बोले, "हे मनुष्यों के स्वामी! मैं प्रसन्नतापूर्वक आपसे एक पुरानी कथा कह रहा हूँ। यह घटना उत्तर दिशा में म्लेच्छों के देश में घटी थी।
 
Bhishma said, "O Lord of men! I am happily telling you an old story. This incident took place in the country of the mlecchas in the north.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)