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mahabharat 12.168.2: ये सज्जन लोग किस प्रकार के हैं? प्रेम करने के लिए श्रेष्ठ कौन हैं? वर्तमान और भविष्य में कौन से लोग दूसरों की सहायता करने में समर्थ हैं? उन सबका वर्णन मुझसे करो।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.168.2 
कीदृशा मानवा: सौम्या: कै: प्रीति: परमा भवेत्।
आयत्यां च तदात्वे च के क्षमास्तान् वदस्व मे॥ २॥
 
 
अनुवाद
ये सज्जन लोग किस प्रकार के हैं? प्रेम करने के लिए श्रेष्ठ कौन हैं? वर्तमान और भविष्य में कौन से लोग दूसरों की सहायता करने में समर्थ हैं? उन सबका वर्णन मुझसे करो।॥2॥
 
What kind of gentle-natured people are these? Who are the best people to love? Which people are capable of helping others in the present and the future? Describe them all to me.॥2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)