Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.168.17-19: राजा को ऐसे लोगों को अपना मित्र बनाना चाहिए - जो कुलीन, बोलने में कुशल, ज्ञान-विज्ञान में निपुण, सुन्दर, गुणवान, लोभरहित, काम करते समय कभी न थकने वाले, अच्छे मित्रों से युक्त, कृतज्ञ, सर्वज्ञ, लोभ से दूर रहने वाले, मधुर स्वभाव वाले, सत्यनिष्ठ, तेजवान, सदा व्यायाम करने वाले, उत्तम कुल के पुत्र, अपने कुल का भार वहन करने में समर्थ, दोषरहित और संसार में प्रसिद्ध हों ॥17-19॥ | mahabharat अध्याय 12.168: मित्र बनाने एवं न बनाने योग्य पुरुषोंके लक्षण तथा कृतघ्न गौतमकी कथाका आरम्भ । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
राजा को ऐसे लोगों को अपना मित्र बनाना चाहिए - जो कुलीन, बोलने में कुशल, ज्ञान-विज्ञान में निपुण, सुन्दर, गुणवान, लोभरहित, काम करते समय कभी न थकने वाले, अच्छे मित्रों से युक्त, कृतज्ञ, सर्वज्ञ, लोभ से दूर रहने वाले, मधुर स्वभाव वाले, सत्यनिष्ठ, तेजवान, सदा व्यायाम करने वाले, उत्तम कुल के पुत्र, अपने कुल का भार वहन करने में समर्थ, दोषरहित और संसार में प्रसिद्ध हों ॥17-19॥
The king should make such people his friends - those who are noble, capable of speaking, skilled in knowledge and science, handsome, virtuous, greedless, never tired of working, full of good friends, grateful, omniscient, staying away from greed, having a sweet nature, committed to the truth, vivacious, always exercising, children of a good family, capable of bearing the burden of their family, faultless and famous in the world. 17-19॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥