Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.167.6: युधिष्ठिर! तुम्हें इन्हीं की प्राप्ति करनी चाहिए। इनसे तुम्हारा मन विचलित नहीं होना चाहिए। ये ही धर्म और अर्थ के मूल हैं। मेरी दृष्टि में यही परम गति हैं ॥6॥ | mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
एतदेवाभिपद्यस्व मा तेऽभूच्चलितं मन:।
एतन्मूलौ हि धर्मार्थावेतदेकपदं हि मे॥ ६॥
अनुवाद
युधिष्ठिर! तुम्हें इन्हीं की प्राप्ति करनी चाहिए। इनसे तुम्हारा मन विचलित नहीं होना चाहिए। ये ही धर्म और अर्थ के मूल हैं। मेरी दृष्टि में यही परम गति हैं ॥6॥
Yudhishthira! You should attain only these. Your mind should not be distracted by these. These are the root of Dharma and Artha. In my opinion these are the ultimate destination. ॥ 6॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥