Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.167.45: जो मनुष्य पूर्वजन्म की बातों को स्मरण रखते हैं और बुढ़ापे के रोगों से पीड़ित रहते हैं, वे नाना प्रकार के सांसारिक दुःखों के अनुभव से निरन्तर पीड़ित रहते हुए मोक्ष की ही स्तुति करते हैं, परन्तु हम लोग उस मोक्ष को बिल्कुल नहीं जानते ॥45॥ | mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
भूतानि जातिस्मरणात्मकानि
जराविकारैश्च समन्वितानि।
भूयश्च तैस्तै: प्रतिबोधितानि
मोक्षं प्रशंसन्ति न तं च विद्म:॥ ४५॥
अनुवाद
जो मनुष्य पूर्वजन्म की बातों को स्मरण रखते हैं और बुढ़ापे के रोगों से पीड़ित रहते हैं, वे नाना प्रकार के सांसारिक दुःखों के अनुभव से निरन्तर पीड़ित रहते हुए मोक्ष की ही स्तुति करते हैं, परन्तु हम लोग उस मोक्ष को बिल्कुल नहीं जानते ॥45॥
Those people who remember the things of their previous lives and are afflicted with the ailments of old age, being constantly afflicted by the experience of various kinds of worldly sorrows, praise only salvation, but we do not know about that salvation at all. ॥ 45॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥