Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.167.44: जो न पाप में लिप्त है, न पुण्य में, न धन कमाने में रुचि रखता है, न धर्म में, न मैथुन में, वह पुरुष जो सब प्रकार के दोषों से रहित है, दुःख-सुख देने वाली शक्तियों से सदा के लिए मुक्त हो जाता है, उस समय उसके लिए मिट्टी का ढेला और सोना एक समान हो जाते हैं ॥ 44॥ | mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
यो वै न पापे निरतो न पुण्ये
नार्थे न धर्मे मनुजो न कामे।
विमुक्तदोष: समलोष्टकाञ्चनो
विमुच्यते दु:खसुखार्थसिद्धे:॥ ४४॥
अनुवाद
जो न पाप में लिप्त है, न पुण्य में, न धन कमाने में रुचि रखता है, न धर्म में, न मैथुन में, वह पुरुष जो सब प्रकार के दोषों से रहित है, दुःख-सुख देने वाली शक्तियों से सदा के लिए मुक्त हो जाता है, उस समय उसके लिए मिट्टी का ढेला और सोना एक समान हो जाते हैं ॥ 44॥
He who is neither involved in sin nor in virtue, neither interested in earning money nor in religion, nor in sex, that man who is free from all kinds of defects, becomes free forever from the powers that give sorrow and happiness, at that time a lump of clay and gold become the same for him. ॥ 44॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥