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mahabharat 12.167.41: बुद्धिमान, दयालु, चंदन के रस से विख्यात और विचित्र मालाओं और आभूषणों से विभूषित भीमसेन उन वीर भाइयों से संक्षेप में और विस्तारपूर्वक उपर्युक्त वचन कहकर चुप हो गए॥41॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 41
 
 
श्लोक  12.167.41 
प्राज्ञ: सुहृच्चन्दनसारलिप्तो
विचित्रमाल्याभरणैरुपेत:।
ततो वच: संग्रहविस्तरेण
प्रोक्त्वाथ वीरान् विरराम भीम:॥ ४१॥
 
 
अनुवाद
बुद्धिमान, दयालु, चंदन के रस से विख्यात और विचित्र मालाओं और आभूषणों से विभूषित भीमसेन उन वीर भाइयों से संक्षेप में और विस्तारपूर्वक उपर्युक्त वचन कहकर चुप हो गए॥41॥
 
Bhimsen, intelligent, kind-hearted, famous with sandalwood essence and adorned with strange garlands and ornaments, became silent after saying the above words to those brave brothers in brief and in detail. 41॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)