vedamrit
Reset
Home
ग्रन्थ
श्रीमद् वाल्मीकि रामायण
श्रीमद् भगवद गीता
______________
श्री विष्णु पुराण
श्रीमद् भागवतम
______________
श्रीचैतन्य भागवत
वैष्णव भजन
About
Contact
श्री महाभारत
»
पर्व 12: शान्ति पर्व
»
अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय
»
श्लोक 4
श्लोक
12.167.4
ततोऽर्थगतितत्त्वज्ञ: प्रथमं प्रतिभानवान्।
जगाद विदुरो वाक्यं धर्मशास्त्रमनुस्मरन्॥ ४॥
अनुवाद
तब अर्थ की गति और तत्त्व को जानने वाले तेजस्वी आत्मा विदुर जी ने धर्मग्रंथों को स्मरण करके सबसे पहले बोलना आरम्भ किया॥4॥
Then Vidur ji, the brilliant soul who knew the speed and essence of meaning, remembered the religious texts and started speaking first. ॥ 4॥
✨ ai-generated
Connect Form
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
© 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas