Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.167.31: कामना से ही मनुष्य वेद और उपवेदों का स्वाध्याय करते हैं और उनमें पारंगत विद्वान बनते हैं। कामना से ही मनुष्य श्राद्ध, यज्ञ, दान और कृतज्ञता के कार्यों में प्रवृत्त होते हैं। 31॥ | mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
वेदोपवेदेष्वपरे युक्ता: स्वाध्यायपारगा:।
श्राद्धयज्ञक्रियायां च तथा दानप्रतिग्रहे॥ ३१॥
अनुवाद
कामना से ही मनुष्य वेद और उपवेदों का स्वाध्याय करते हैं और उनमें पारंगत विद्वान बनते हैं। कामना से ही मनुष्य श्राद्ध, यज्ञ, दान और कृतज्ञता के कार्यों में प्रवृत्त होते हैं। 31॥
It is only with desire that people self-study the Vedas and Upavedas and become proficient scholars in them. It is due to desire that people tend to do Shraddha, Yagya, charity and gratitude. 31॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥