Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.167.30: किसी न किसी कामना में आसक्त होकर ही ऋषिगण तपस्या में लीन रहते हैं। वे फल, मूल और पत्ते चबाकर जीवित रहते हैं। वे वायु पीकर अपने मन और इंद्रियों को वश में रखते हैं। | mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
किसी न किसी कामना में आसक्त होकर ही ऋषिगण तपस्या में लीन रहते हैं। वे फल, मूल और पत्ते चबाकर जीवित रहते हैं। वे वायु पीकर अपने मन और इंद्रियों को वश में रखते हैं।
Only by being attached to some desire or the other do the sages engage in penance. They survive by chewing fruits, roots and leaves. They control their mind and senses by drinking air.
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥