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mahabharat 12.167.24: जो धन धर्म से संयुक्त है और जो धर्म धन से सम्पन्न होता है, वह तुम्हारे लिए अवश्य ही अमृत के समान होगा, ऐसा हम दोनों का मत है।   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 24
 
 
श्लोक  12.167.24 
योऽर्थो धर्मेण संयुक्तो धर्मो यश्चार्थसंयुत:।
तद्धि त्वामृतसंवादं तस्मादेतौ मताविह॥ २४॥
 
 
अनुवाद
जो धन धर्म से संयुक्त है और जो धर्म धन से सम्पन्न होता है, वह तुम्हारे लिए अवश्य ही अमृत के समान होगा, ऐसा हम दोनों का मत है।
 
The wealth which is combined with Dharma and the Dharma which is accomplished through wealth will certainly be like nectar for you, this is the opinion of both of us. 24.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)