श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय  »  श्लोक 22
 
 
श्लोक  12.167.22 
नकुलसहदेवावूचतु:
आसीनश्च शयानश्च विचरन्नपि वा स्थित:।
अर्थयोगं दृढं कुर्याद् योगैरुच्चावचैरपि॥ २२॥
 
 
अनुवाद
नकुल और सहदेव बोले, 'महाराज! मनुष्य को चाहिए कि वह अपनी आय को छोटे-बड़े सभी साधनों से, बैठे-बैठे, सोते-जागते, चलते-फिरते, खड़े-खड़े, सभी प्रकार से बढ़ाए।'
 
Nakul and Sahadeva said, 'Maharaj! A man should strengthen his income by means of all means, big or small, while sitting, sleeping, walking or even standing. 22.
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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