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mahabharat 12.167.11: अर्जुन बोले - राजन! यह कर्मभूमि है। यहाँ केवल जीविका के साधन कर्मों की ही प्रशंसा की जाती है। खेती, व्यापार, गोपालन और विविध शिल्प- ये सब धनोपार्जन के साधन हैं। 11॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.167.11 
अर्जुन उवाच
कर्मभूमिरियं राजन्निह वार्ता प्रशस्यते।
कृषिर्वाणिज्यगोरक्षं शिल्पानि विविधानि च॥ ११॥
 
 
अनुवाद
अर्जुन बोले - राजन! यह कर्मभूमि है। यहाँ केवल जीविका के साधन कर्मों की ही प्रशंसा की जाती है। खेती, व्यापार, गोपालन और विविध शिल्प- ये सब धनोपार्जन के साधन हैं। 11॥
 
Arjun said – King! This is the land of action. Here only the activities which are a means of livelihood are praised. Farming, trade, cow rearing and various crafts – all these are means of earning money. 11॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)