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mahabharat 12.167.1: वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! जब भीष्मजी ऐसा कहकर चुप हो गए, तब राजा युधिष्ठिर ने घर जाकर अपने चारों भाइयों और पाँचवें विदुरजी से पूछा -॥1॥   |   mahabharat अध्याय 12.167: धर्म, अर्थ और कामके विषयमें विदुर तथा पाण्डवोंके पृथक्-पृथक् विचार तथा अन्तमें युधिष्ठिरका निर्णय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
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श्लोक  12.167.1 
वैशम्पायन उवाच
इत्युक्तवति भीष्मे तु तूष्णींभूते युधिष्ठिर:।
पप्रच्छावसथं गत्वा भ्रातॄन् विदुरपञ्चमान्॥ १॥
 
 
अनुवाद
वैशम्पायनजी कहते हैं - 'हे जनमेजय! जब भीष्मजी ऐसा कहकर चुप हो गए, तब राजा युधिष्ठिर ने घर जाकर अपने चारों भाइयों और पाँचवें विदुरजी से पूछा -॥1॥
 
Vaishmpayana says, 'O Janamejaya! When Bhishma became silent after saying this, then King Yudhishthira went home and asked his four brothers and the fifth one, Vidurji -॥ 1॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)