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mahabharat 12.166.88: हे भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार मैंने तुम्हें तलवार की उत्पत्ति की कथा विस्तारपूर्वक और उसके मूल रूप में सुनाई है। इससे सिद्ध होता है कि तलवार ही सबसे पहले प्रकट हुआ था।   |   mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 88
 
 
श्लोक  12.166.88 
इत्येष प्रथम: कल्पो व्याख्यातस्ते सुविस्तरात्।
असेरुत्पत्तिसंसर्गो यथावद् भरतर्षभ॥ ८८॥
 
 
अनुवाद
हे भरतश्रेष्ठ! इस प्रकार मैंने तुम्हें तलवार की उत्पत्ति की कथा विस्तारपूर्वक और उसके मूल रूप में सुनाई है। इससे सिद्ध होता है कि तलवार ही सबसे पहले प्रकट हुआ था।
 
O best of the Bharatas! Thus I have narrated to you the story of the origin of the sword in detail and in its original form. This proves that the sword was the first weapon to have appeared. 88
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)