श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 82
 
 
श्लोक  12.166.82 
कृत्तिकास्तस्य नक्षत्रमसेरग्निश्च दैवतम्।
रोहिणी गोत्रमस्याथ रुद्रश्च गुरुरुत्तम:॥ ८२॥
 
 
अनुवाद
उस 'असि' का नक्षत्र कृत्तिका है, देवता अग्नि हैं, गोत्र रोहिणी है और श्रेष्ठ गुरु रुद्रदेव हैं ॥82॥
 
The constellation of that 'Asi' is Krittika, the deity is Agni, the Gotra is Rohini and the best guru is Rudradev. 82॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)