श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन  »  श्लोक 5
 
 
श्लोक  12.166.5 
अत्र मे संशयश्चैव कौतूहलमतीव च।
किंस्वित् प्रहरणं श्रेष्ठं सर्वयुद्धेषु पार्थिव॥ ५॥
 
 
अनुवाद
पृथ्वीनाथ! मुझे इस विषय में संदेह और अत्यंत जिज्ञासा हो रही है कि समस्त युद्धों में कौन-सा अस्त्र श्रेष्ठ है?॥5॥
 
Prithvinath! I have a doubt and extreme curiosity in this matter as to which weapon is the best in all the wars? ॥ 5॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)