Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.166.42-43h: समस्त प्राणी भय के कारण बार-बार व्याकुल हो रहे थे। उस भयानक प्रेत को प्रकट हुआ देखकर पितामह ब्रह्माजी ने महर्षियों, देवताओं और गन्धर्वों से कहा -॥42 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.166: खड्गकी उत्पत्ति और प्राप्तिकी परम्पराकी महिमाका वर्णन । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
मुहुर्मुहुश्च भूतानि प्राव्यथन्त भयात् तथा।
तत: स तुमुलं दृष्ट्वा तं च भूतमुपस्थितम्॥ ४२॥
महर्षिसुरगन्धर्वानुवाचेदं पितामह:।
अनुवाद
समस्त प्राणी भय के कारण बार-बार व्याकुल हो रहे थे। उस भयानक प्रेत को प्रकट हुआ देखकर पितामह ब्रह्माजी ने महर्षियों, देवताओं और गन्धर्वों से कहा -॥42 1/2॥
All beings were repeatedly distressed due to fear. Seeing that terrifying ghost appearing, Grandfather Brahma said to the great sages, Gods and Gandharvas -॥ 42 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥