श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 165: नाना प्रकारके पापों और उनके प्रायश्चित्तोंका वर्णन  »  श्लोक 17
 
 
श्लोक  12.165.17 
प्रभु: प्रथमकल्पस्य योऽनुकल्पे न वर्तते।
न साम्परायिकं तस्य दुर्मतेर्विद्यते फलम्॥ १७॥
 
 
अनुवाद
जो मूर्ख मनुष्य मुख्य विधि के अनुसार कार्य करने में समर्थ होते हुए भी गौण विधि का प्रयोग करता है, वह दिव्य फल को प्राप्त नहीं करता ॥17॥
 
A foolish person who, despite being capable of doing work according to the main method, still uses the secondary method, does not attain the transcendental fruit. 17॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)