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mahabharat 12.164.9: जहाँ कहीं दूसरों की निन्दा होती है, वहाँ वह उनके छिपे हुए दोषों को भी प्रकट कर देता है। और जहाँ उसके और दूसरों के अपराध समान होते हैं, वहाँ भी वह अपनी जीविका के लिए दूसरों का नाश कर देता है। ॥9॥   |   mahabharat अध्याय 12.164: नृशंस अर्थात् अत्यन्त नीच पुरुषके लक्षण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 164: नृशंस अर्थात् अत्यन्त नीच पुरुषके लक्षण  »  श्लोक 9
 
 
श्लोक  12.164.9 
परेषां यत्र दोष: स्यात् तद् गुह्यं सम्प्रकाशयेत्।
समानेष्वेव दोषेषु वृत्त्यर्थमुपघातयेत्॥ ९॥
 
 
अनुवाद
जहाँ कहीं दूसरों की निन्दा होती है, वहाँ वह उनके छिपे हुए दोषों को भी प्रकट कर देता है। और जहाँ उसके और दूसरों के अपराध समान होते हैं, वहाँ भी वह अपनी जीविका के लिए दूसरों का नाश कर देता है। ॥9॥
 
Wherever others are defamed, he reveals their hidden faults as well. And even when his and others' crimes are equal, he ruins others for the sake of his livelihood. ॥ 9॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)