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mahabharat 12.164.2: जैसे मनुष्य मार्ग में काँटों, कुओं और अग्नि से दूर रहते हैं, वैसे ही मनुष्य पाप करने वाले मनुष्य से दूर ही रहते हैं।॥2॥   |   mahabharat अध्याय 12.164: नृशंस अर्थात् अत्यन्त नीच पुरुषके लक्षण   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 164: नृशंस अर्थात् अत्यन्त नीच पुरुषके लक्षण  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.164.2 
कण्टकान् कूपमग्निं च वर्जयन्ति यथा नरा:।
तथा नृशंसकर्माणं वर्जयन्ति नरा नरम्॥ २॥
 
 
अनुवाद
जैसे मनुष्य मार्ग में काँटों, कुओं और अग्नि से दूर रहते हैं, वैसे ही मनुष्य पाप करने वाले मनुष्य से दूर ही रहते हैं।॥2॥
 
Just as men avoid thorns, wells and fires on their way, so too men avoid a man committing atrocious deeds from a distance.॥ 2॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)