Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.164.10: जो कोई उसकी सहायता करता है, उसे वह अपने जाल में फंसा हुआ समझता है और यदि वह किसी सहायता करने वाले को धन दे भी दे, तो भी उसे बहुत समय तक पछतावा होता है ॥10॥ | mahabharat अध्याय 12.164: नृशंस अर्थात् अत्यन्त नीच पुरुषके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
जो कोई उसकी सहायता करता है, उसे वह अपने जाल में फंसा हुआ समझता है और यदि वह किसी सहायता करने वाले को धन दे भी दे, तो भी उसे बहुत समय तक पछतावा होता है ॥10॥
He considers anyone who helps him to be trapped in his net, and even if he gives money to someone who helps him, he regrets it for a long time. ॥10॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥