Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7
mahabharat 12.163.21: सांसारिक सुखों के लिए जीवों में जो लोभ दिखाई देता है, वह अज्ञान के कारण है। जब मनुष्य सुखों की क्षणभंगुरता को देख और समझ लेता है, तो वह लोप हो जाता है ॥21॥   |   mahabharat अध्याय 12.163: काम, क्रोध आदि तेरह दोषोंका निरूपण और उनके नाशका उपाय   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 163: काम, क्रोध आदि तेरह दोषोंका निरूपण और उनके नाशका उपाय  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.163.21 
अज्ञानप्रभवो लोभो भूतानां दृश्यते सदा।
अस्थिरत्वं च भोगानां दृष्ट्वा ज्ञात्वा निवर्तते॥ २१॥
 
 
अनुवाद
सांसारिक सुखों के लिए जीवों में जो लोभ दिखाई देता है, वह अज्ञान के कारण है। जब मनुष्य सुखों की क्षणभंगुरता को देख और समझ लेता है, तो वह लोप हो जाता है ॥21॥
 
The greed that is seen in living beings for worldly pleasures is due to ignorance. It vanishes when one sees and understands the transience of pleasures. ॥ 21॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)