Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.163.16: अहंकारी मनुष्य अपने उत्तम कुल, उत्तम विद्या और धन का अभिमान करके अहंकारी हो जाते हैं; किन्तु अपने वास्तविक स्वरूप को जान लेने पर उनका अहंकार तुरन्त ही नष्ट हो जाता है ॥16॥ | mahabharat अध्याय 12.163: काम, क्रोध आदि तेरह दोषोंका निरूपण और उनके नाशका उपाय । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
कुलाज्ज्ञानात् तथैश्वर्यान्मदो भवति देहिनाम्।
एभिरेव तु विज्ञातै: स च सद्य: प्रणश्यति॥ १६॥
अनुवाद
अहंकारी मनुष्य अपने उत्तम कुल, उत्तम विद्या और धन का अभिमान करके अहंकारी हो जाते हैं; किन्तु अपने वास्तविक स्वरूप को जान लेने पर उनका अहंकार तुरन्त ही नष्ट हो जाता है ॥16॥
Being proud of one's noble lineage, excellent knowledge and wealth, egoistic persons become arrogant; but on knowing their true nature, such arrogance vanishes instantly. ॥16॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥