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mahabharat 12.162.7: मैं तुम्हें यह भी बताना चाहता हूँ कि वह सत्य कैसे प्राप्त होता है। ध्यानपूर्वक सुनो। भारत! समस्त लोकों में तेरह प्रकार के सत्य माने गए हैं।   |   mahabharat अध्याय 12.162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 162: सत्यके लक्षण, स्वरूप और महिमाका वर्णन  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.162.7 
प्राप्यते च यथा सत्यं तच्च श्रोतुमिहार्हसि।
सत्यं त्रयोदशविधं सर्वलोकेषु भारत॥ ७॥
 
 
अनुवाद
मैं तुम्हें यह भी बताना चाहता हूँ कि वह सत्य कैसे प्राप्त होता है। ध्यानपूर्वक सुनो। भारत! समस्त लोकों में तेरह प्रकार के सत्य माने गए हैं।
 
I also want to tell you how that truth is attained. Listen carefully. Bharat! In all the worlds, thirteen types of truth have been recognized. 7.
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)