श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 161: तपकी महिमा  »  श्लोक 2
 
 
श्लोक  12.161.2 
प्रजापतिरिदं सर्वं तपसैवासृजत् प्रभु:।
तथैव वेदानृषयस्तपसा प्रतिपेदिरे॥ २॥
 
 
अनुवाद
भगवान प्रजापति ने तप से ही इस सम्पूर्ण जगत् की रचना की है और ऋषियों ने तप से ही वेदों का ज्ञान प्राप्त किया है॥2॥
 
Lord Prajapati has created this entire world through penance and the sages have acquired the knowledge of the Vedas through penance. 2॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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