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श्लोक 12.161.2  |
प्रजापतिरिदं सर्वं तपसैवासृजत् प्रभु:।
तथैव वेदानृषयस्तपसा प्रतिपेदिरे॥ २॥ |
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| अनुवाद |
| भगवान प्रजापति ने तप से ही इस सम्पूर्ण जगत् की रचना की है और ऋषियों ने तप से ही वेदों का ज्ञान प्राप्त किया है॥2॥ |
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| Lord Prajapati has created this entire world through penance and the sages have acquired the knowledge of the Vedas through penance. 2॥ |
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