श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 7
 
 
श्लोक  12.16.7 
एवं गते महाराज राज्यं प्रति जनाधिप।
हेतुमत्र प्रवक्ष्यामि तमिहैकमना: शृणु॥ ७॥
 
 
अनुवाद
महाराज! हे जनेश्वर! ऐसी स्थिति में मैं आपको राज्य की ओर आकर्षित करने का कारण बता रहा हूँ। कृपया एकाग्रचित्त होकर सुनें॥ 7॥
 
‘Maharaj! O Janeshwar! In such a situation, I am telling you the reason for attracting you towards the kingdom. Please listen with concentration.॥ 7॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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