श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 29
 
 
श्लोक  12.16.29 
यजस्व वाजिमेधेन विधिवद् दक्षिणावता।
वयं ते किंकरा: पार्थ वासुदेवश्च वीर्यवान्॥ २९॥
 
 
अनुवाद
कुन्तीनन्दन! आप विधिपूर्वक दक्षिणा देकर अश्वमेध यज्ञ का अनुष्ठान करें। हम सब भाई और महाबली श्रीकृष्ण आपके आज्ञाकारी हैं॥ 29॥
 
'Kuntinandan! You should perform the Ashwamedha Yagna ritual by giving Dakshina as per the prescribed method. All of us brothers and the mighty Sri Krishna are obedient to you.॥ 29॥
 
इति श्रीमहाभारते शान्तिपर्वणि राजधर्मानुशासनपर्वणि भीमवाक्ये षोडशोऽध्याय:॥ १६॥
इस प्रकार श्रीमहाभारत शान्तिपर्वके अन्तर्गत राजधर्मानुशासनपर्वमें भीमवाक्यविषयक सोलहवाँ अध्याय पूरा हुआ॥ १६॥

(दाक्षिणात्य अधिक पाठका १ श्लोक मिलाकर कुल ३० श्लोक हैं)
 
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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