श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 28
 
 
श्लोक  12.16.28 
दिष्टॺा दुर्योधन: पापो निहत: सानुगो युधि।
द्रौपद्या: केशपाशस्य दिष्टॺा त्वं पदवीं गत:॥ २८॥
 
 
अनुवाद
सौभाग्य से पापी दुर्योधन युद्ध में अपने सेवकों सहित मारा गया; और सौभाग्य से आप दु:शासन के हाथों से छूटकर द्रौपदी के केशों के पाश के समान युद्ध से छूट गए॥ 28॥
 
'Fortunately, the sinful Duryodhana was killed along with his servants in the war; and fortunately you were freed from the hands of Dushasan and got rid of the war like the noose of Draupadi's hair.॥ 28॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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