श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 21
 
 
श्लोक  12.16.21 
पुनरज्ञातचर्यायां कीचकेन पदा वधम्।
द्रौपद्या राजपुत्र्याश्च कथं विस्मृतवानसि॥ २१॥
 
 
अनुवाद
‘फिर आप उस घटना को अचानक कैसे भूल गए, जब वनवास के समय कीचक ने आपके सामने राजकुमारी द्रौपदी को लात मारी थी?॥ 21॥
 
‘Then how did you suddenly forget the incident when during the exile, Kichaka kicked Princess Draupadi in front of you?॥ 21॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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