श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 18
 
 
श्लोक  12.16.18 
दृष्ट्वा सभागतां कृष्णामेकवस्त्रां रजस्वलाम्।
मिषतां पाण्डुपुत्राणां न तस्य स्मर्तुमर्हसि॥ १८॥
 
 
अनुवाद
तुमने अपनी आँखों से देखा कि पाण्डुपुत्रों के देखते-देखते वस्त्रधारी और रजस्वला कृष्ण को कौरव सभा में लाया गया। क्या तुम्हें वह घटना स्मरण नहीं करनी चाहिए?॥18॥
 
‘You saw with your own eyes a clothed and menstruating Krishna being brought to the Kaurava assembly in full view of the sons of Pandu. Should you not remember that incident?॥18॥
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  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
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