श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 15
 
 
श्लोक  12.16.15 
कश्चित् सुखे वर्तमानो दु:खस्य स्मर्तुमिच्छति।
कश्चिद् दु:खे वर्तमान: सुखस्य स्मर्तुमिच्छति॥ १५॥
 
 
अनुवाद
‘कुछ लोग सुख में रहते हुए भी अपने दुःखों को याद रखना चाहते हैं, और कुछ लोग दुःख में रहते हुए भी अपने सुखों को याद रखना चाहते हैं ।॥15॥
 
‘Some people want to remember their sorrows while living in happiness, and some people want to remember their happiness while living in sadness.॥ 15॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)