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श्लोक 12.16.14  |
तेषामन्यतमोत्सेके विधानमुपदिश्यते।
हर्षेण बाध्यते शोको हर्ष: शोकेन बाध्यते॥ १४॥ |
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| अनुवाद |
| इनमें से किसी एक के बढ़ने पर उपाय बताया जाता है। सत्त्वगुण से दुःख (रजोगुण) का नाश होता है और दुःख से सुख का नाश होता है।॥14॥ |
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| ‘When any one of these increases, the remedy is prescribed. Sorrow (Rajo Guna) is alleviated by joy (Sattva) and joy is alleviated by sorrow.॥ 14॥ |
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