श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 16: भीमसेनका राजाको भुक्त दु:खोंकी स्मृति कराते हुए मोह छोड़कर मनको काबूमें करके राज्यशासन और यज्ञके लिये प्रेरित करना  »  श्लोक 14
 
 
श्लोक  12.16.14 
तेषामन्यतमोत्सेके विधानमुपदिश्यते।
हर्षेण बाध्यते शोको हर्ष: शोकेन बाध्यते॥ १४॥
 
 
अनुवाद
इनमें से किसी एक के बढ़ने पर उपाय बताया जाता है। सत्त्वगुण से दुःख (रजोगुण) का नाश होता है और दुःख से सुख का नाश होता है।॥14॥
 
‘When any one of these increases, the remedy is prescribed. Sorrow (Rajo Guna) is alleviated by joy (Sattva) and joy is alleviated by sorrow.॥ 14॥
 ✨ ai-generated
 
 
  Connect Form
  हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥
  © 2026 vedamrit.in All Rights Reserved. Developed by AmritChaitanyaDas