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mahabharat 12.159.8: महाराज! आप जो अज्ञान पूछ रहे हैं, उसकी उत्पत्ति और वृद्धि का मुझसे विस्तृत वर्णन सुनिए।॥8॥   |   mahabharat अध्याय 12.159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना   ।   mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व   ।   श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
 
श्री महाभारत  »  पर्व 12: शान्ति पर्व  »  अध्याय 159: अज्ञान और लोभको एक दूसरेका कारण बताकर दोनोंकी एकता करना और दोनोंको ही समस्त दोषोंका कारण सिद्ध करना  »  श्लोक 8
 
 
श्लोक  12.159.8 
एतस्य वा प्रवृत्तेश्च वृद्धॺादीन्यांश्च पृच्छसि।
विस्तरेण महाराज शृणु तच्च विशेषत:॥ ८॥
 
 
अनुवाद
महाराज! आप जो अज्ञान पूछ रहे हैं, उसकी उत्पत्ति और वृद्धि का मुझसे विस्तृत वर्णन सुनिए।॥8॥
 
Maharaj! Listen to my detailed description of the origin and growth of this ignorance which you are asking. ॥ 8॥
 
 समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)