Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.15-16h: जिस पुरुष ने अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर लिया है, उसे आसक्ति सहित लोभ को भी जीत लेना चाहिए। हे कृष्णपुत्र! अहंकार, छल, निन्दा, चुगली और ईर्ष्या- ये सब दोष उन लोभी पुरुषों में ही पाए जाते हैं, जिन्होंने अपनी आत्मा को नहीं जीता है। ॥15 1/2॥ | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
स लोभ: सह मोहेन विजेतव्यो जितात्मना।
दम्भो द्रोहश्च निन्दा च पैशुन्यं मत्सरस्तथा॥ १५॥
भवन्त्येतानि कौरव्य लुब्धानामकृतात्मनाम्।
अनुवाद
जिस पुरुष ने अपने मन और इन्द्रियों को वश में कर लिया है, उसे आसक्ति सहित लोभ को भी जीत लेना चाहिए। हे कृष्णपुत्र! अहंकार, छल, निन्दा, चुगली और ईर्ष्या- ये सब दोष उन लोभी पुरुषों में ही पाए जाते हैं, जिन्होंने अपनी आत्मा को नहीं जीता है। ॥15 1/2॥
A man who has controlled his mind and senses should conquer greed along with attachment. O son of Krishna! Arrogance, treachery, slander, gossip and envy – all these defects are found only in greedy men who have not conquered their souls. ॥15 1/2॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥