Deprecated: str_replace(): Passing null to parameter #3 ($subject) of type array|string is deprecated in /var/www/3ba56740-d0e5-465a-99e5-33425b2f2eb0/vedamrit.in/bookscommon/sloka.php on line 7 mahabharat 12.158.13-14: लोभी मनुष्य बहुत-सा लाभ पाकर भी संतुष्ट नहीं होता। वह सुखों से कभी संतुष्ट नहीं होता। हे मनुष्यों के स्वामी! न तो देवता, न गंधर्व, न राक्षस, न बड़े-बड़े सर्प और न ही समस्त प्राणी लोभ के वास्तविक स्वरूप को जानते हैं॥ 13-14॥ | mahabharat अध्याय 12.158: समस्त अनर्थोंका कारण लोभको बताकर उससे होनेवाले विभिन्न पापोंका वर्णन तथा श्रेष्ठ महापुरुषोंके लक्षण । mahabharat पर्व 12: शान्ति पर्व । श्री महाभारत Sri Mahabharat | वेदामृत — Vedamrit | वैदिक ग्रंथों का संग्रह
न प्रहृष्यति यो लाभै: कामैर्यश्च न तृप्यति॥ १३॥
यो न देवैर्न गन्धर्वैर्नासुरैर्न महोरगै:।
ज्ञायते नृप तत्त्वेन सर्वैर्भूतगणैस्तथा॥ १४॥
अनुवाद
लोभी मनुष्य बहुत-सा लाभ पाकर भी संतुष्ट नहीं होता। वह सुखों से कभी संतुष्ट नहीं होता। हे मनुष्यों के स्वामी! न तो देवता, न गंधर्व, न राक्षस, न बड़े-बड़े सर्प और न ही समस्त प्राणी लोभ के वास्तविक स्वरूप को जानते हैं॥ 13-14॥
A greedy man is not satisfied even after getting a lot of benefits. He is never satisfied with pleasures. O Lord of men! Neither the gods, nor the Gandharvas, nor the demons, nor the big serpents, nor all the living creatures know the true nature of greed.॥ 13-14॥
समीक्षित और संदर्भानुकूल अनुवाद (Contextual Translation)
हरे कृष्ण हरे कृष्ण कृष्ण कृष्ण हरे हरे। हरे राम हरे राम राम राम हरे हरे॥